दोस्तों इस वेबसाइट पर ओशो के द्वारा बताई गई ध्यान की 5 विधि मैंने पहले आपको बता दी थी ये है 6 नंबर की विधि. Osho की सभी विधि पढने के लिए यहाँ पर क्लिक करें
Osho All Dhyan Vidhi
घंटेभर के इस शक्तिशाली ध्यान में पंद्रह-पंद्रह मिनट के चार चरण हैं। पहला चरण खड़े होकर करना है; दूसरा बैठकर; तीसरा और चौथा सर्वथा निष्क्रिय होकर। सूर्योदय के बाद या सूर्यास्त के पहले, इसे कभी भी किया जा सकता है।
पहला चरण - ओशो
आंखें खुली रखकर एक ही स्थान पर खड़े-खड़े दौड़ें। जहां तक बन पड़े घुटनों को ऊपर उठाएं। श्वास को गहरा और सम रखें। इससे ऊर्जा सारे शरीर में घूमने लगेगी।
दूसरा चरण Osho
आंखें बंद कर बैठ जाएं। मुंह को शिथिल और खुला रखें—और धीमे-धीमे चक्राकार झूमें—जैसे हवा में पेड़-पौधे झूमते हैं। इससे भीतर जागी ऊर्जा नाभि-केंद्र पर आ जाएगी।
तीसरा चरण
अब आंखें खोलकर पीठ के बल सीधे लेट जाएं—और दोनों आंखों की पुतलियों को क्लॉकवाइज़-बाएं से दाएं वृत्ताकार घुमाएं। पहले धीरे-धीरे घुमाना शुरू करें, क्रमशः गति को तेज और वृत्त को बड़ा करते जाएँ।
ध्यान की अन्य विधि -
मुंह को शिथिल व खुला रखें तथा सिर को बिलकुल स्थिर। श्वास मंद एवं कोमल बनी रहे। इससे नाभि-केंद्रित ऊर्जा तीसरी-आंख पर आ जाएगी।
चौथा चरण
आंखें बंद कर निष्क्रिय हो रहें। विश्राम में चले जाएं—ताकि तीसरी-आंख पर एकत्रित हो गयी ऊर्जा अपना काम कर सके।
ओशो की अन्य Meditation Techniques -
Osho All Dhyan Vidhi
घंटेभर के इस शक्तिशाली ध्यान में पंद्रह-पंद्रह मिनट के चार चरण हैं। पहला चरण खड़े होकर करना है; दूसरा बैठकर; तीसरा और चौथा सर्वथा निष्क्रिय होकर। सूर्योदय के बाद या सूर्यास्त के पहले, इसे कभी भी किया जा सकता है।
पहला चरण - ओशो
आंखें खुली रखकर एक ही स्थान पर खड़े-खड़े दौड़ें। जहां तक बन पड़े घुटनों को ऊपर उठाएं। श्वास को गहरा और सम रखें। इससे ऊर्जा सारे शरीर में घूमने लगेगी।
दूसरा चरण Osho
आंखें बंद कर बैठ जाएं। मुंह को शिथिल और खुला रखें—और धीमे-धीमे चक्राकार झूमें—जैसे हवा में पेड़-पौधे झूमते हैं। इससे भीतर जागी ऊर्जा नाभि-केंद्र पर आ जाएगी।
तीसरा चरण
अब आंखें खोलकर पीठ के बल सीधे लेट जाएं—और दोनों आंखों की पुतलियों को क्लॉकवाइज़-बाएं से दाएं वृत्ताकार घुमाएं। पहले धीरे-धीरे घुमाना शुरू करें, क्रमशः गति को तेज और वृत्त को बड़ा करते जाएँ।
ध्यान की अन्य विधि -
मुंह को शिथिल व खुला रखें तथा सिर को बिलकुल स्थिर। श्वास मंद एवं कोमल बनी रहे। इससे नाभि-केंद्रित ऊर्जा तीसरी-आंख पर आ जाएगी।
चौथा चरण
आंखें बंद कर निष्क्रिय हो रहें। विश्राम में चले जाएं—ताकि तीसरी-आंख पर एकत्रित हो गयी ऊर्जा अपना काम कर सके।
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