एक लड़का था अरुण। उसे हर समय अपने जीवन से शिकायत रहती थी। बचपन आर्थिक तंगी में बीता था, इसलिए वह यह मान ही बैठा था कि उसके हाथ किस्मत वाली रेखा है ही नहीं।
उसके दादा, जिन्होंने दुनिया देख रखी थी, वे अरुण की इस सोच से परेशान थे। उनका माननो था कि यदि यह खुद को बदकिस्मत ही मान बैठेगा तो कभी भी जिंदगी में अच्छा कुछ करने का प्रयास नहीं कर पाएगा।
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Motivational Hindi Stories[/caption]
वह लगातार अरुण को समझाते रहते लेकिन अरुण तो मानोे बचपन की मुश्किलों को दिल से ही लगा बैठा था। कभी कुछ नया करने का प्रयास वह यह कहकर टाल देता, जब अपनी किस्मत ही खराब है तो कोशिश का क्या फायदा?
एक बार अरुण व उसके दादा घर के बाहर बैठे थे कि तभी वहां से एक रिब्शा होकर निकला। रिब्शा चालक का एक हाथ नहीं था लेकिन वह बहुत खुशमिजाज था। इसे देखकर अरुण हैरान था। तब उसके दादा ने कहा- तुम किस्मत की रेखा की बात करते हो, इसका तो हाथ भी नहीं है, फिर भी यह किस्मत खुद लिख रहा है। अरुण को यह सीख समझ आ गई।
Friends हमें इस Motivational Hindi Story से शिक्षा मिलती है कि पुरुषार्थ से अपनी किस्मत बनाएं।
उसके दादा, जिन्होंने दुनिया देख रखी थी, वे अरुण की इस सोच से परेशान थे। उनका माननो था कि यदि यह खुद को बदकिस्मत ही मान बैठेगा तो कभी भी जिंदगी में अच्छा कुछ करने का प्रयास नहीं कर पाएगा।
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Motivational Hindi Stories[/caption]वह लगातार अरुण को समझाते रहते लेकिन अरुण तो मानोे बचपन की मुश्किलों को दिल से ही लगा बैठा था। कभी कुछ नया करने का प्रयास वह यह कहकर टाल देता, जब अपनी किस्मत ही खराब है तो कोशिश का क्या फायदा?
एक बार अरुण व उसके दादा घर के बाहर बैठे थे कि तभी वहां से एक रिब्शा होकर निकला। रिब्शा चालक का एक हाथ नहीं था लेकिन वह बहुत खुशमिजाज था। इसे देखकर अरुण हैरान था। तब उसके दादा ने कहा- तुम किस्मत की रेखा की बात करते हो, इसका तो हाथ भी नहीं है, फिर भी यह किस्मत खुद लिख रहा है। अरुण को यह सीख समझ आ गई।
Friends हमें इस Motivational Hindi Story से शिक्षा मिलती है कि पुरुषार्थ से अपनी किस्मत बनाएं।