Skip to main content

गलती का ढिंढ़ोरा

दो सहकमीर् थे। दोनों काम में अच्छे थे लेकिन बतार्व के मामले में एक-दूसरे से काफी भिन्न थे। पहला सहकमीर् जानता था कि उसकी गलतियां जबरन निकाली जाती हैं, इसलिए वह गलतियां निकालने वालों को बकशता नहीं था।

वह ऐसे लोगों की गलतियां पकड़ने में जुटा रहता। कोई गलती पकड़ मेंआने पर सबके बीच ठीक वैसा ही प्रचारकरता जाता, जैसा कि कभी उस व्यक्ति ने इसके खिलाफ किया होता था।

वह अपने दूसरे साथी से अक्सर इस बात पर नोराज होता था कि वह दूसरों की गलतियां ढ़ूंढ़़कर उन्हें शर्मिदा क्यों नहीं करता? या जब वे लोगउसे किसी गलती पर डांटते हैं, तो तुरंत अपनोबचाव क्यों नहीं करता?

एक दिन जब इसनेउस मित्रा से इस बारे में पूछा, तब उसने बताया- मित्रा, मैं तुम्हें या तुम्हारे नजरिए को पूरी तरह गलत नहीं कह रहा, लेकिन मेरा मानना यह है कि यदि मैं किसी दूसरे की गलती ढ़ूंढ़ने में ही लगा रहा तो निश्चित तौर पर अपने काम में गलती कर बैठूंगा।

[caption id="attachment_632" align="alignleft" width="300"]शिक्षाप्रद कहानियाँ शिक्षाप्रद कहानि[/caption]

इसलिए मैं ऐसा नहीं करता हूं। रही बात सामने वाले द्वारा मेरी गलती बताए जाने पर अपनो बचाव करने की, तो तुरंत बचाव न करके मैं उनकी बात सुन लेता हूं और फिर देखता हूं कि क्या वाकई मैंने गलती की है? यदि हां, तो मैं इससे सीख जाता हू, नहीं तो चुपचाप उन्हें पूरी बात बता आता हूं। इससे सामने वाला शर्मिदा भीहो जाता है। दोनो ही स्थितियों में जीत तो मेरी ही होती है।

 

 

 

 

दोस्तों इस Hindi Story से हमें शिक्षा मिलती है कि किसी की गलती ढ़ूंढ़़ने की बजाय अपनी सुधारें।

Popular posts from this blog

कुंडलिनी ध्यान : Osho Meditation Technique

दोस्तों आज मैं आपके साथ कुंडलिनी ध्यान (kundalini Meditation) विधि शेयर करने जा रहा हू जो ओशो (Osho) के द्वारा बताई गई है. यह एक अदभुत ध्यान-पद्धति है और इसके जरिए मस्तिष्क से हृदय में उतर आना आसान हो जाता है। [caption id="attachment_698" align="alignnone" width="300"] ओशो कुंडलिनी ध्यान विधि[/caption] एक घंटे के इस ध्यान में पंद्रह-पंद्रह मिनट के चार चरण हैं। पहले और दूसरे चरण में आंखें खुली रखी जा सकती हैं। लेकिन तीसरे और चौथे चरण में आंखें बंद रखनी हैं। सांझ इसके लिए सर्वाधिक उपयुक्त समय है। पहले चरण की संगति सपेरे के बीन-स्वर के साथ बिठायी गयी है। जैसे बीन-स्वर पर जैसे सर्प अपनी कुंडलिनी तोड़कर उठता है, और फन निकालकर नाचने लगता है, वैसे ही इस ध्यान के सम्यक प्रयोग पर साधक की सोई हुई कुंडलिनी शक्ति जाग उठती है। कुंडलिनी ध्यान विधि (By Osho) का  पहला चरण  शरीर को बिलकुल ढीला छोड़ दें और पूरे शरीर को कंपाएं, शेक करें। अनुभव करें कि ऊर्जा पांव से उठकर ऊपर की ओर बढ़ रही है। kundalini Meditaion  विधि ( Osho) का दूसरा चरण संगीत की लय पर नाचे—जैसा आपको भाए—और...

अग्निशिखा ध्यान : ओशो ध्यान विधि

दोस्तों आज मैं आपके सामने ओशो (Osho) के द्वारा बताई गई सर्वप्रसिद विधि (Meditation) अग्निशिखा (Agnishikha) Share कर रहा हु आशा करता हु आपको पसंद आएगी. अच्छा हो कि शाम के समय अग्निशिखा ध्यान किया जाए। और यदि मौसम गर्म हो तो कपड़े उतारकर। इस ध्यान-विधि में पांच-पांच मिनट के तीन चरण हैं। पहला चरण कल्पना करें कि आपके हाथ में एक ऊर्जा का गोला है—गेंद है। थोड़ी देर में यह गोला कल्पना से यथार्थ सा हो जाएगा। वह आपके हाथ पर भारी हो जाएगा। दूसरा चरण ऊर्जा की इस गेंद के साथ खेलना शुरू करें। इसके वजन को, इसके द्रव्यमान को अनुभव करें। जैसे-जैसे यह ठोस होता जाए, इसे एक हाथ से दूसरे हाथ में फेंकना शुरू करें। ओशो की एक अन्य विधि पढने के लिए यहाँ पर क्लिक करें - सक्रिय ध्यान विधि : ओशो  Osho Active Meditation    यदि आप दक्षिणहस्तिक हैं तो दाएं हाथ से शुरू करें और बाएं हाथ से अंत; और यदि वामहस्तिक हैं तो यह प्रक्रिया उलटी होगी। गेंद को हवा में उछालें, अपने चारों ओर उछालें, अपने पैरों के बीच से उछालें-लेकिन ध्यान रखें कि गेंद जमीन पर न गिरे। अन्यथा खेल फिर से शुरू करना पड़ेगा। इस चरण के अंत में गें...

मंडल ध्यान : Osho Meditation Technique

दोस्तों इस वेबसाइट पर ओशो के द्वारा बताई गई ध्यान की 5 विधि मैंने पहले आपको बता दी थी ये है 6 नंबर की विधि. Osho की सभी विधि पढने के लिए यहाँ पर क्लिक करें Osho All Dhyan Vidhi घंटेभर के इस शक्तिशाली ध्यान में पंद्रह-पंद्रह मिनट के चार चरण हैं। पहला चरण खड़े होकर करना है; दूसरा बैठकर; तीसरा और चौथा सर्वथा निष्क्रिय होकर। सूर्योदय के बाद या सूर्यास्त के पहले, इसे कभी भी किया जा सकता है। पहला चरण - ओशो  आंखें खुली रखकर एक ही स्थान पर खड़े-खड़े दौड़ें। जहां तक बन पड़े घुटनों को ऊपर उठाएं। श्वास को गहरा और सम रखें। इससे ऊर्जा सारे शरीर में घूमने लगेगी। दूसरा चरण Osho आंखें बंद कर बैठ जाएं। मुंह को शिथिल और खुला रखें—और धीमे-धीमे चक्राकार झूमें—जैसे हवा में पेड़-पौधे झूमते हैं। इससे भीतर जागी ऊर्जा नाभि-केंद्र पर आ जाएगी। तीसरा चरण अब आंखें खोलकर पीठ के बल सीधे लेट जाएं—और दोनों आंखों की पुतलियों को क्लॉकवाइज़-बाएं से दाएं वृत्ताकार घुमाएं। पहले धीरे-धीरे घुमाना शुरू करें, क्रमशः गति को तेज और वृत्त को बड़ा करते जाएँ। ध्यान की अन्य विधि - कुंडलिनी ध्यान : Osho Meditation मुंह को शिथिल व ख...