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सीखना है काम

एक ऑफिस में एक ही वर्क प्रोफाइल पर दो लोग नियुक्त हुए- निपुण और उदय। निपुण की डिग्रीज, प्रशिक्षण और अनुभव से ऑफिस में बहुत लोग प्रभावित थे, जबकि ठीक-ठाक पढ़़े उदय को किसी भी अन्य आम कर्मचारी की तरह ही देखा जाता।

निपुण की पिछली योग्यताओं को देखते हुए सीनियर्स उस पर काफी ध्यान देते। उसे किसी काम को करने के जैसे-जैसे निर्देश दिए जाते, वह ठीक वैसे ही काम करके ले आता। जबकि उदय को सिर्फ अपने प्रोजेब्ट और उसकी डेडलाइन का पता होता था। किसी भी उचित गाइडेंस के अभाव में वह खुद सीनियर्स के पास जा-जाकर पूछता और अपने काम को उत्कृष्ट ढ़ंग से करके तय समय पर ले आता।कएक बड़े प्रोजेब्ट के लिए दोनों में से किसी एक का चयन करने के लिए मैनेजर ने एक परीक्षा ली। उसने दोनों को एक काम सौंप दिया।

निपुण किसी भी दिशा-निर्देश की सूची न मिलने पर घबरा गया था क्योंकि सिर्फ बताए गए तरीकों से काम करते हुए वह जान ही नहीं पाया था कि काम करने के अलग- अलग तरीके हैं क्या? वहीं उदय को रटे-रटाए निर्देशों पर चलने के बजाय कहीं अधिक तरीकों का ज्ञान था, तो उसने यह प्रोजेकट जल्दी ही पूरा करके दे दिया। यह घटना निपुण के लिए एक सबक बन गई और वह समझ गया कि हर काम के लिए सिर्फ निर्देशों का इंतजार करते रहना दरअसल अपनी क्षमताओं को कुंद करता है। आज उसने काम को खुद करके सीखने का महत्व समझ लिया।

 दोस्तों इस Motivational Hindi Story से हमें यह सिख मिलती है कि काम को सिर्फ खत्म न करें, इसे सीखें भी, यह काम आएगा।

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