महेन्द्रगढ़ जिले के मंडलाना निवासी धीरेन्द्र सिंह यादव बचपन से ही नौकरी न करने और रोजगार देने का सपना मन में संजोए थे। इसको साकार करने के लिए हमेशा तत्पर भी रहते थे। पढ़ाई में भी अच्छे थे। दर्शनशास्त्र से एमए भी किया। कोई बात न बनी तो बागवानी ही इन्हें एक मजबूत रास्ता दिखा। जिस पर चल इन्होंने मंजिल पा ली। आज अपने गांव के किसानों के प्रेणास्रोत बन गए है। गांव के किसान इनसे सब्जी और बागवानी की जानकारी ले अच्छी आय ले रहे है। इन्होंने 40 मजदूरों को रोजगार दिया है।
खेती कैसे करें? अब इस सवाल का जवाब आप इस वेबसाइट पर पा सकते है अब आप खेती से करोडपति बन सकते है जाने कैसे तो पढ़ते रहे इस साईट को. ऐसी ही बहुत जानकारी है इस साईट पर तो बुकमार्क में जरुर डाल लिजिए इस साईट को CTRL + D दबाकर बुकमार्क में डालें
बागवानी विभाग बना मार्गदर्शक Kheti ki jaanakri
खेती में अधिक लोगों की आवश्यकता होती है। इससे खेती महंगी हो जाती है। बागवानी विभाग नारनौल के डॉ. धर्मसिंह यादव ने बागवानी के प्रति प्रेरित किया। बागवानी के साथ सब्जी की खेती का टिप्स दिया। वहां से जानकारी ले 2005 में एक एकड़ में 110 पेड़ बेर के लगाए। बेर के पौधे को नीलगायों ने खूब नुकसान पहुंचाया। बागवानी से मोहभंग होने लगा। फिर किन्नू के साथ सब्जी की खेती शुरू की।
किन्नू ने बदली जिंदगी Crodpati banae me kinnu ka saath
2008 में ढाई एकड़ में किन्नू लगाया। उस समय किन्नू की बागवानी के लिए 75 प्रतिशत सबसिडी मिलती थी। लगभग 30 हजार रुपए खर्च हुए। तीसरे साल में किन्नू के पौधे फल देने लगे। पहले ही साल में 40 हजार रुपए का फायदा हुआ। दूसरे साल 50 हजार रुपए और तीसरे साल 310 क्विंटल किन्नू का उत्पादन हुआ। 15 रुपए किलो में किन्नू को बेचा। चार लाख रुपए की प्राप्ति हुई। किन्नू के साथ मिर्च-बैंगन, टमाटर और सरसों की भी खेती की। मार्च से अक्टूबर तक सब्जी का उत्पादन होता रहता है। लगभग 8 हजार रुपए की सब्जी नारनौल मंडी में बिक जाती है।
मौसंबी ने भी दिया साथ sbjiyon se krodpati banane me mausmbi ka saath
किन्नू से फायदे के बाद ढाई एकड़ में मौसंबी लगाई। तीसरे साल से मौसंबी मिलने लगी। 2012 में प्रति एकड़ 20 हजार का फायदा हुआ। वर्ष 2013 और 2014 में अच्छा फायदा हुआ। लगभग प्रति वर्षप्रति एकड़ फायदा बढ़ता ही जा रहा है। साथ में गेहूं, घीया, भिंडी की भी खेती की करते हैं। पुरस्कार : अच्छी बागवानी के लिए जिला बागवानी विभाग की ओर से तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।
खेती कैसे करें? अब इस सवाल का जवाब आप इस वेबसाइट पर पा सकते है अब आप खेती से करोडपति बन सकते है जाने कैसे तो पढ़ते रहे इस साईट को. ऐसी ही बहुत जानकारी है इस साईट पर तो बुकमार्क में जरुर डाल लिजिए इस साईट को CTRL + D दबाकर बुकमार्क में डालें
बागवानी विभाग बना मार्गदर्शक Kheti ki jaanakri
खेती में अधिक लोगों की आवश्यकता होती है। इससे खेती महंगी हो जाती है। बागवानी विभाग नारनौल के डॉ. धर्मसिंह यादव ने बागवानी के प्रति प्रेरित किया। बागवानी के साथ सब्जी की खेती का टिप्स दिया। वहां से जानकारी ले 2005 में एक एकड़ में 110 पेड़ बेर के लगाए। बेर के पौधे को नीलगायों ने खूब नुकसान पहुंचाया। बागवानी से मोहभंग होने लगा। फिर किन्नू के साथ सब्जी की खेती शुरू की।
किन्नू ने बदली जिंदगी Crodpati banae me kinnu ka saath
2008 में ढाई एकड़ में किन्नू लगाया। उस समय किन्नू की बागवानी के लिए 75 प्रतिशत सबसिडी मिलती थी। लगभग 30 हजार रुपए खर्च हुए। तीसरे साल में किन्नू के पौधे फल देने लगे। पहले ही साल में 40 हजार रुपए का फायदा हुआ। दूसरे साल 50 हजार रुपए और तीसरे साल 310 क्विंटल किन्नू का उत्पादन हुआ। 15 रुपए किलो में किन्नू को बेचा। चार लाख रुपए की प्राप्ति हुई। किन्नू के साथ मिर्च-बैंगन, टमाटर और सरसों की भी खेती की। मार्च से अक्टूबर तक सब्जी का उत्पादन होता रहता है। लगभग 8 हजार रुपए की सब्जी नारनौल मंडी में बिक जाती है।
मौसंबी ने भी दिया साथ sbjiyon se krodpati banane me mausmbi ka saath
किन्नू से फायदे के बाद ढाई एकड़ में मौसंबी लगाई। तीसरे साल से मौसंबी मिलने लगी। 2012 में प्रति एकड़ 20 हजार का फायदा हुआ। वर्ष 2013 और 2014 में अच्छा फायदा हुआ। लगभग प्रति वर्षप्रति एकड़ फायदा बढ़ता ही जा रहा है। साथ में गेहूं, घीया, भिंडी की भी खेती की करते हैं। पुरस्कार : अच्छी बागवानी के लिए जिला बागवानी विभाग की ओर से तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।