स्वामी विवेकानंद ने विश्वभर को अपने प्रभावशाली व्यत्तित्व से मोहित किया। 12 जनवरी को उनके जन्मदिन के दिन देशभर में युवा दिवस मनोया जाता है। आज हम पढ़़ेंगे उनके प्रेरणादायी व्यत्तित्व से संबंधित कहानियां। विनम्र बनो, साहसी बनो, शत्तिशाली बनो। एक बार बनोरस में स्वामी जी दुगार् जी के मंदिर से निकल रहे थे, तभी बहुत सारे बंदरों ने उन्हें घेर लिया। वे उनके नज़दीक आकर उन्हें डराने लगे। स्वामी जी दौड़कर भागने लगे। पास ही खड़े एक वृद्ध संन्यासी यह सब देख रहे थे, उन्होंने स्वामी जी से कहा, रुको! उनका सामनो करो। स्वामी जी तुरन्त पलटे और बंदरों की तरफ बढ़़ने लगे। ऐसा देख सारे बन्दर भाग गए। इस घटनो से स्वामी जी को एक सीख मिली और कई सालों बाद उन्होंने एक संबोधन में कहा भी कि यदि तुम किसी चीज़ से भयभीत हो तो उससे भागो मत, उसका सामनो करो। स्वामी विवेकानंद हमेशा सच बोलते थे। वे शुरु से ही एक होनहार छात्रा थे। जब वे अपने साथियों को कुछ बताते, तो सब मंत्रामुग्ध हो उन्हें सुनते। एक दिन इंटरवल के दौरान वे कक्षा में कुछ मित्राों को कहानी सुनो रहे थे, सभी उनकी बातें सुनने में इतने मग्न थे कि उन्हें पता ही नहीं...