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स्वामी विवेकानंद पर निबन्ध

स्वामी विवेकानंद ने विश्वभर को अपने प्रभावशाली व्यत्तित्व से मोहित किया। 12 जनवरी को उनके जन्मदिन के दिन देशभर में युवा दिवस मनोया जाता है। आज हम पढ़़ेंगे उनके प्रेरणादायी व्यत्तित्व से संबंधित कहानियां। विनम्र बनो, साहसी बनो, शत्तिशाली बनो। एक बार बनोरस में स्वामी जी दुगार् जी के मंदिर से निकल रहे थे, तभी बहुत सारे बंदरों ने उन्हें घेर लिया। वे उनके नज़दीक आकर उन्हें डराने लगे। स्वामी जी दौड़कर भागने लगे। पास ही खड़े एक वृद्ध संन्यासी यह सब देख रहे थे, उन्होंने स्वामी जी से कहा, रुको! उनका सामनो करो। स्वामी जी तुरन्त पलटे और बंदरों की तरफ बढ़़ने लगे। ऐसा देख सारे बन्दर भाग गए। इस घटनो से स्वामी जी को एक सीख मिली और कई सालों बाद उन्होंने एक संबोधन में कहा भी कि यदि तुम किसी चीज़ से भयभीत हो तो उससे भागो मत, उसका सामनो करो। स्वामी विवेकानंद हमेशा सच बोलते थे। वे शुरु से ही एक होनहार छात्रा थे। जब वे अपने साथियों को कुछ बताते, तो सब मंत्रामुग्ध हो उन्हें सुनते। एक दिन इंटरवल के दौरान वे कक्षा में कुछ मित्राों को कहानी सुनो रहे थे, सभी उनकी बातें सुनने में इतने मग्न थे कि उन्हें पता ही नहीं...

Loan क्यों, कैसे और कहाँ से लें?

अगर लोन (Loan) लेने की सोच रहे हैं, तो ज़रूरी है Bank से लोन (Loan) संबंधी सभी ज़रूरी जानकारियां हासिल कर लें. लोन (Loan) की ईएमआई, इंटरेस्ट रेट, प्रक्रिया आदि पहलुओं पर गौर कर लें, ताकि सही निर्णय ले सकें. यहां लोन (Loan) से संबंधित पूरी जानकारी दे रहे हैं आईडीबीआई Bank के लोन (Loan) एक्सपर्ट अमित कुमार दुबे. लोन (Loan) संबंधी जनरल टिप्स कोई भी लोन (Loan) लेने से पहले मार्केट की पूरी रिसर्च कर लें, जैसे- Bank की ब्याज दर, लोन (Loan) की अवधि, किन-किन डॉक्यूमेंट्स की ज़रूरत होगी? महिलाओं के लिए कोई विशेष ऑफर हैं? इत्यादि. u लोन (Loan) ऐसी संपत्ति के लिए लें, जिसे भविष्य में बेचने पर मुनाफ़ा मिले. अपनी वार्षिक आय के ५ गुना से ज़्यादा लोन (Loan) न लें. लोन (Loan) लेने में किसी तरह की जल्दबाज़ी न करें. सभी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त करने के बाद ही कोई निर्णय लें. डॉक्यूमेंट्स की सभी फोटोकॉपीज़ को अटेस्ट कराकर तैयार रखें. लोन (Loan) संबंधी डॉक्यूमेंट्स जमा करते समय Bank एग्ज़ीक्यूटिव को घर-कार आदि के ओरिजनल पेपर्स न दें. लोन (Loan) के दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करने...

दिमाग शांत करने वाले 4 प्रश्न के उत्तर

दुनिया में कितनी भाषाएं हैं?- अथोनो ब्लोग कैटलोग के अनुसार, 7102जीवंत भाषाएं हैं। इनमें से तकरीबन दो हजार भाषाएं तो ऐसी हैं, जिन्हें बोलने वाले लोगों की संक्या एक हजार से भी कम है।   सेलोटेप का आविष्कार किसने और कैसे किया था?- लोटेप के आविष्कारक का नोम हैरिचर्ड जी ड्रयू। वह अमरीका के निवासी थे और केमिकल इंजीनियर थे। ड्रयूमिनेसोटा माइनिंग एंड मेन्युफैकब्चरिंग कम्पनीमें काम करते थे। इस कंपनी को आज हम3एम के नोम से जानते हैं। यह कम्पनी वर्ष1926 से रेगमाल या सैंडपेपर बनोती रहीहै। इसमें सिलिका और एल्यूमीनियमऑक्साइड का इस्तेमाल होता था। इस पेपरके आविष्कार में भी ड्रयू का योगदान था।इस सिलसिले में उन्हें गोंद और रबड़ कीतरह चिपकने वाले रसायनो को समझने कामौका मिला। उन दिनो अमरीका में दो रंगोंवाली कारों का फैकशन चला। दो रंगों का पेंटकरने के लिए कार कम्पनियां एक रंग का पेंटकरने के बाद दूसरे हिस्से पर पेंट करते हुएउस पहले केकहिस्से पर टेप लगाकर माçस्ंकगकर देती थीं, जिन पर वह रंग नहीं करनोहोता था। ऐसा इसलिए किया जाता था ताकिउस हिस्से पर पेंट न पड़े। बाद में टेप हटालिया जाता था। इससे कार पर दोनो र...

क्या होता है हिंदी कहानियों से?

सीख देती हैं कहानियां बच्चे हों या बड़े, कहानियां(Story) सबको अच्छी लगती हैं। ये कल्पना की उड़ान भरने के लिए ही प्रेरित नहीं करती, हमें यथार्थ की समझ भी दे जाती हैं। इनमें उपदेश की कड़वाहट नहीं होती, लेकिन जीवन से जुड़ी हर सीख होती है। इसीलिए बचपन में सुनी गई कहानियां हमारे व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाती हैं। ये बच्चों और बड़ों के बीच संवाद का सहज माध्यम होती हैं। पहले परिवार के बड़े लोग खुद रुचि लेकर बच्चों को कहानियां सुनाया करते थे ताकि उन्हें सीधे कुछ कहे बिना अपने समाज और जीवन की सीख दे सकें, लेकिन आज माता-पिता के पास भी इतना समय नहीं है कि वे अपने बच्चों को कभी-कभी कहानियां सुना सकें। बेडटाइम स्टोरीज़ बीते दिनों की बात होती जा रही हैं। इसकी वजहों और असर के साथ-साथ इस पर मशहूर शख्सीयतों के विचार भी आप जान सकते हैं कवर स्टोरी 'मां सुनाओ कहानी' में। बरसात का मौसम अब दस्तक दे चुका है और सखी समय के अनुसार आपकी ज़रूरतों का हमेशा ख़याल रखती रही है। बरसात के मौसम में अपना सौंदर्य बरकरार रखने के लिए ज़रूरी बातों की जानकारी है ‘रखें अपना ख़याल' में। हमारे पर्यटन स्थल केवल मौज-मस्...