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कबीर दास जी के दोहे 8th August

1. मैं इस संसार में बुराई खोजने चला था, सबसे ज्यादा बुराई तो मेरे अंदर थी. 2. हर काम समय पर ही होता है आप एक पेड़ को एक ही दिन 100 घड़े पानी पिलाकर उसके फल नहीं लगा सकते. फल तो समय आने पर ही लगेंगे कबीर दास का दोहा दोहा 3. किसी की भी जाति ना पूछकर उसका काम पूछना चाहिए क्यों कि तलवार से ज्यादा म्यान का महत्व नहीं होता है वो एक उसका आवरण है. कबीर दास का दोहा दोहा 4. मनुष्य का स्वभाव है कि उसे दूसरों के दुःख दोष दिखते है हंसी आती है बल्कि उसी समय खुद के दोष नहीं दिखाई नहीं देते है. कबीर दास का दोहा Doha 5. बहुत अधिक भी नहीं बोलना नहीं चाहिए और कम भी नहीं जिस प्रकार बहुत अधिक धुप और वर्षा अच्छी नहीं लगती है. दोहा 6. जो हमारी कमियों बताये उसे हमेशा अपने पास रखना चाहिए क्योंकि वही आपको सुधार सकताहै आपको. कबीर दास का दोहा 7. कबीर का एक ही मकसद दुनिया दोस्त ना हो तो दुश्मन भी ना हो. 8. अपने जीवन को व्यर्थ गंवा रहे है रात को सो कर और दिन को खाकर. 9. कबीर कहते है हे मानव क्यों करता है इतना गरूर काम तेरे आगे पीछे घूम रहा है कही पर तुम्हे ढाल सकता है घर में या प्रदेश में. कबीर दास का दोहा 10. जिस प्...