दोस्तों आपकीसहायता हिंदी पोर्टल पर ये ओशो के द्वारा बताई गई ध्यान की 8 वि विधि है पहले की साथ विधि इस प्रकार है सक्रिय ध्यान कुंडलिनी ध्यान अग्निशिखा ध्यान कीर्तन ध्यान गौरीशंकर ध्यान मंडल ध्यान त्राटक ध्यान विधि : ओशो इन सभी विधियों को पढने में आपको समय लग सकता है इसलिए इस साईट बाद में देखने के लिए या फिर कभी पढने के लिए अपने ब्राउज़र में के Bookmark में डाल ले बुकमार्क में डालने के लिए Ctrl + D दबाएँ. और दायीं साईट में ईमेल सब्सक्रिप्शन आप्शन उसमे अपनी ईमेल डाल दे जिससे ध्यान या ओशो के बारे में आने वाली नई जानकारी आपके ईमेल में मेसेज से पहुच जाए वो भी फ्री में. इसलिए अभी अपना ईमेल डालें. नटराज (Nataraj) ध्यान के संबंध में बोलते हुए ओशो ने कहा है—परमात्मा को हमने नटराज की भांति सोचा है। हमने शिव की एक प्रतिमा भी बनाई है नटराज के रूप में। परमात्मा नर्तक की भांति है, एक कवि या चित्रकार की भांति नहीं। एक कविता या पेंटिंग बनकर कवि से, पेंटर से अलग हो जाती है; लेकिन नृत्य को नर्तक से अलग नहीं किया जा सकता। उनका अस्तित्व एक साथ है; कहना चाहिए एक है। नृत्य और नर्तक एक हैं...