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वास्तु शास्त्र में दिशाओ का महत्व

उत्तर दिशा इस दिशा में भूमि तुलनात्मक रूप से नीची होनी चाहिए तथा बालकनी भी इसी दिशा में हो, तो बेहतर है. इसी तरह ज़्यादा से ज़्यादा दरवाज़े और खिड़कियां इसी दिशा में होने चाहिए. बरामदा, पोर्टिको, बॉश बेसिन आदि भी इसी दिशा में होने चाहिए. उत्तर में वास्तुदोष हो तो धन हानि या करियर में बाधाएं आती हैं. ऐसी स्थिति में घर में बुध यंत्र रखें, बुधवार को व्रत रखें और दीवारों पर उत्तर-पूर्व दिशा इस दिशा को ईशान भी कहते हैं. इस दिशा में ज़्यादातर स्थान पूल आदि इसी दिशा में होने चाहिए. घर का मुख्य द्वार भी यदि इसी दिशा में हो तो बेहद शुभ माना जाता है, ईशान में वास्तुदोष हो तो द्वार पर रुद्र तोरण लगाएं, शिव उपासना करें तथा सोमवार का व्रत रखें. पूर्व दिशा इस दिशा में खुला स्थान तथा प्रवेश द्वार हो, तो गृहस्वामी को लंबी उम्र, मान-सम्मान तथा संतान सुख मिलता है. इस दिशा में भूमि वॉश बेसिन आदि इस दिशा में बनाए जा सकते हैं. बचे भी इसी दिशा की तरफ मुंह करके पढे तो विद्यालाभ होता है. पूर्व में वास्तु दोष हो तो सूर्य यंत्र की स्थापना करें, सूर्य को अध्र्य दें, सूर्य की उपासना करें तथा पूर्वी दरवाजे पर मंगल...