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आलू की खेती के रोग

समस्या - आलू की फसल पर पत्तियों पर काले धब्बे दिख रहे हैं। इसका क्या कारण है उपचार बताये।- आलू फसल में कंद बनने केपहले बुआई के 4-5 सप्ताह बाद ही अगेतीझुलसा रोग आता है जिसके कारण पत्तियों परकाले गोल धब्बे बन जाते हैं। बढ़कर पत्तियों की भोजन संचार व्यवस्था में बाधा डालते हैंऔर आलू के कंदों के विकास में कमी लाकरउत्पादन प्रभावित करते हैं। आलू पर दिसम्बर-जनवरी के आसपास कम तापमान और भारी आद्रता के कारण पिछेती झुलसा भी पत्तियों परआता है जो अधिक हानिकारक होता है एकरात में फसल चोपट करने की क्षमता रखता है अगेती झुलसा की रोकथाम के लिये निम्नउपाय करें इसका असर पिछेती झुलसा के नियंत्रण पर भी असर करेगा। 1. मेन्कोजेब 2 ग्राम/लीटर पानी में घोलबनाकर 10-15 दिनों के अंदर दो-तीनछिड़काव करें। 2. ताम्रयुक्त फफूंदनाशी डाईफोलेटानअथवा बोडो¸ मिश्रेण ताजा बनाकर दो छिड़काव10-15 दिनों के अंतर से करें लाभ होगा।सिंचाई नियंत्रित करें।   People Who Does Not Know Hindi - [read more="Read more" less="Read less"] Samasya - aalu ki phasala para pattiyom para kale dhabbe dikha rahe haim. Isaka kya karaṇa h...

दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी फार्म बना रहा है चीन

[read more="Read more" less="Read less"]  फ्रांस अलग-अलग तरह के पनीर बनाने के लिए जाना जाता है। अमेरिकी दूध बहुत पीते हैं, लेकिन एशिया के लोगों को पशुधन से मिलने वाले किसी भी खाद्य में कम ही रुचि रहती है। इसके बावजूद चीन में दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी फार्म बनने जा रहा है। इस डेयरी फार्म में एक लाख गायें पल रही होंगी। अमेरिका में सबसे बड़े डेयरी फार्म में मात्र 30 हजार गायें हैं। अभी दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी फार्म भी चीन में है, लेकिन वहां 40 हजार गायें ही पल रही हैं। Cow dairy farm [/read]   [/चीन इस डेयरी का निर्माण घरेलू खपत के लिए नहीं, बल्कि निर्यात के लिए कर रहा है। चीनी लोग दूध को पसंद नहीं करते हैं क्योंकि वे इसमें पाए जाने वाले लैक्टोज को मुश्किल से ही पचा पाते हैं। चीन इस डेयरी से बनने वाले उत्पादों का रूस को निर्यात करेगा। रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डेयरी आयातक देश है। अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों के कारण रूस को आयात में कठिनाइयां हैं। ] रूस भी करेगा सहयोग - Dairy Farm इस डयरी  फार्म में रूस भी सहयोग करेगा। वह अपने यहां 2 लाख 84 हजार एकड़ में पशु चारे का उत्पादन...

करेले की खेती से करोडपति बने

बुआई का समय } उत्तर भारत में इसकी बिजाई फरवरी व मार्च के अलावा जून व जुलाई में की जा सकती है। 5 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर डाला जाता है। नालियों के बीच 1.5 मीटर एवं पौधों के बीच 1 मीटर की दूरी होनी चाहिए। खाद } 50 टन गोबर की पकी खाद खेत तैयार करते समय डालें। 125 किलोग्राम अमोनियम सल्फेट या किसान खाद, 150 किलोग्राम सुपरफॉस्फेट तथा 50 किलोग्राम म्युरेट आॅफ पोटाश तथा फॉलीडाल चूर्ण 3 प्रतिशत 15 किलोग्राम का मिश्रण 500 ग्राम प्रति गड्ढे की दर से बीज बोने से पूर्व मिला लेते हैं। 125 किलोग्राम अमोनियम सल्फेट या अन्य खाद फूल आने के समय पौधों के पास मिट्टी अच्छी तरह से मिलाते हैं।   बुआई } बीजों को नालियों के दोनों तरफ बुआई करते हैं। नालियों की सिंचाई करके मेड़ों पर पानी की सतह के ऊपर 2-3 बीज एक स्थान पर इस प्रकार लगाए जाते हैं कि बीजों को नमी कैपिलरी मूवमेंट से प्राप्त हो। अंकुर निकल आने पर आवश्यकतानुसार छंटाई कर दी जाती है। बीज बोने से 24 घंटे पहले भिगोकर रखें, जिससे अंकुरण में सुविधा होती है।     सिंचाई एवं निराई-गुड़ाई } फसल की सिंचाई वर्षा पर आधारित है। साधारण प्रति 8-10 दि...