Skip to main content

Posts

Showing posts with the label Hindi Kahani

सबसे कीमती

Hindi Motivational Story प्रेरणादायक हिंदी कहानी बहुत समय पहले जयपुर में राजा जयसिंह का शासन था। जयसिंह वीर औरविद्वान थे और वे दूसरे विद्वानों का भी समान करते थे। एक दिन सारे दरबारियों के सामने राजा ने पूछा- संसार में सबसे कीमती चीज क्या है?राजा के ऐसा पूछने पर सभी दरबारी अपनी-अपनी राय देने लगे। दरबारी तनवीरबोला- हीरा सबसे कीमती वस्तु है महाराज!रणजीत सिंह ने कहा- महाराज! मोती के सामने तो हीरा भी फीका है।किसी ने सोनो, तो किसी ने अन्न को कीमती बताया। राजा का मंत्री चंद्रभान बड़ाबुद्धिमान था। उसने एक योजनो बनोई। एक दिन राजा और मंत्री शिकार पर गए।शिकार करते-करते दोनों काफी दूर निकल गए। राजा को थकान के कारण प्यासलगने लगी।मंत्री ने कहा- राजन! मेरे पास हीरा है, पर इसे कहां बेचें?मंत्री जी! पानी का हीरे से €या रिश्ता? आप कहीं से भी पानी का इंतजाम करें।थोड़ी दूर चलने पर उन्हें एक झोपड़ी नजर आई। वहां एक बुढि़या रहती थी। उसनेराजा को पानी पिलाया। उसकी झोपड़ी के पास पीपल का एक पेड़था। पेड़ की छाया में राजा चबूतरे पर बैठ गए। राजा ने बुढि़याको अपनो परिचय दिया। कुछ देर बाद राजा को भूखलगने लगी। बुढि़य...

शेखीबाश मक्खी

एक था जंगल। उस जंगल में एक शेर भोजन करके आराम कर रहा था। इतने में एक मक्खी उड़ती-उड़ती वहाँ आ पहुँची। शेर ने दो-तीन दिनों से स्नान नहीं किया था। इसलिए मक्खी शेर के कान के एकदम पास भिन-भिन-भिन करने लगी। शेर को बहुत मुश्किल से नींद आई थी। उसने पंजा उठाया। मक्खी उड़ गई ... लेकिन फिर से शेर के कान के पास भिन-भिन शुरू हो गई। अब शेर को गुस्सा आया। वह दहाड़ा दृअरे मक्खी, दूर हट। वरना तुझे अभी जान से मार डालूँगा। मक्खी ने ध्ीरे से कहा दृ छि... छि... ! जंगल के राजा के मुँह से ऐसी भाषा कहीं शोभा देती है? शेर का गुस्सा बढ़ गया। उसने कहा दृ एक तो मुझे सोने नहीं देती, उफपर से मेरे सामने जवाब देती है! चुप हो जा... वरना अभी... मक्खी बोली दृ वरना क्या कर लोगे? मैं क्या तुमसे डर जाउँफगी? मैं तो तुमसे भी लड़ सकती हूँ। हिम्मत हो तो आ जाओ...! शेर आग बबूला हो उठा। उसने कान के पास पंजा मारा। मक्खी तो उड़ गई पर कान शरा छिल गया। मक्खी उड़कर शेर की नाक पर बैठी तो उसने मक्खी को फिर पंजा मारा। मक्खी उड़ गई। अबकी बार शेर की नाक छिल गई। मक्खी कभी शेर के माथे पर बैठती, कभी गाल पर, तो कभी गर्दन पर। शेर पंजा मारता जा...

प्रोत्साहन है जरुरी

हिंदी कहानी : किसी को मोटीवेट करना अच्छी बात होती उसी पर आधारित यह Story है. कमल ने एक बार विकास को उसके परिवार के साथ अपने घर खाने पर बुलाया। उसने विकास को अपने बेटे से मिलवाया। जब विकास ने उससे उसके शौकों के बारे में पूछा तो बच्चा बेहद उत्साह से फुटबॉल आदि के बारे में बताने लगा। तभी कमल ने उसे टोककर उसके गणित के अंकों पर बात करने के लिए कहा। दोनो के बच्चे अंदर खेलने चले गए तो कमल ने विकास को बताया- इसका ध्यान खेलकूद में ज्यादा है। परेशान हो गया हूं। अब मैंने इसकी दो-दो टयूशन लगवा दी हैं। न फालतू वक्त होगा, न ध्यान भटकेगा। कुछ समय बाद कमल का परिवार विकास के घर आया तो विकास ने अपने बेटे को बुलाकर गिटार बजाने के लिए कहा। इतना सुंदर गिटार सुनकर कमल हैरान रह गया। तब विकास बोला- दोस्त, बच्चों को प्रोत्साहन की जरुरत होती है। इनकी पसंद को प्रोत्साहन दोगे तो पढ़़ाई में भी इनका मन लगेगा। मेरा बेटा गिटार तो बजाता ही है, अपनी कक्षा में अच्छे अंक भी लाता है। यदि मैं इसके शौक की कद्र करनो छोड़ दूंगा तो यह भी मेरी उम्मीदों को कोई खास तवज्जों नहीं दे पाएगा। कमल को विकास की बात का मूल समझ आ गया था। दो...

Father's Day

शांति स्वरूप जी आराम कुर्षी से टिके गुमसुम बैठे प्रेम आश्रम में हो रही Father’s Dayकी तैयारियों को देखरहे थे! पिता और मातÎ दिवस को आश्रेम वाले विशेष रूपसे मना कर यहां रहने वाले बुजुर्गो को सम्मान देते हैं और उनके प्रति आदर का भाव प्रकट करते हैं! अब तो आश्रेमकी यह परंपरा ही हो गई है! इस दिन बिल्कुल उत्सव जैसावातावरण हो जाता है! यह आश्रेम भी परिवार की तरह हीतो है! चोंधियाई आंखों से शांतिस्वरूप जी ने आश्रेम के बाग में नजर डाली! दूधिया रोशनी में बोगनबेलिया कीफूलों भरी टहनियां उन्हें बहुत अच्छी लग रही थी।हवा के तेज झोंके खिड़की से अन्दर शांतिस्वरूप जीके कमरे तक आ रहे थे! Father’s Day के पहले दिन की यहशाम कुछ सिंदूरी थी! बोगेनबेलिया के बैंगनी फूल कुछअधिक मस्ती के साथ झूम रहे थे एवं मन को प्रफुलित कर रहे थे! वह सुकून से बैठे थे, पर बीच-बीच में एकदमसे बेचैन हो जाते थे! क्या कभी ऐसी बेचैनी की शांतिस्वरूप जी ने कल्पना की थी?वह आंखें मूंद कर याद करने लगे। आप Hindi की सबसे बड़ी Website जिस पर आपको हर प्रकार की जानकारी मिल जाएगी हर प्रकार की जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें और और हिंदी कहानियों के लि...

हाथ में किस्मत

एक लड़का था अरुण। उसे हर समय अपने जीवन से शिकायत रहती थी। बचपन आर्थिक तंगी में बीता था, इसलिए वह यह मान ही बैठा था कि उसके हाथ किस्मत वाली रेखा है ही नहीं। उसके दादा, जिन्होंने दुनिया देख रखी थी, वे अरुण की इस सोच से परेशान थे। उनका माननो था कि यदि यह खुद को बदकिस्मत ही मान बैठेगा तो कभी भी जिंदगी में अच्छा कुछ करने का प्रयास नहीं कर पाएगा। [caption id="attachment_635" align="alignnone" width="300"] Motivational Hindi Stories[/caption] वह लगातार अरुण को समझाते रहते लेकिन अरुण तो मानोे बचपन की मुश्किलों को दिल से ही लगा बैठा था। कभी कुछ नया करने का प्रयास वह यह कहकर टाल देता, जब अपनी किस्मत ही खराब है तो कोशिश का क्या फायदा? एक बार अरुण व उसके दादा घर के बाहर बैठे थे कि तभी वहां से एक रिब्शा होकर निकला। रिब्शा चालक का एक हाथ नहीं था लेकिन वह बहुत खुशमिजाज था। इसे देखकर अरुण हैरान था। तब उसके दादा ने कहा- तुम किस्मत की रेखा की बात करते हो, इसका तो हाथ भी नहीं है, फिर भी यह किस्मत खुद लिख रहा है। अरुण को यह सीख समझ आ गई। Friends हमें इस Motivational Hindi St...

गलती का ढिंढ़ोरा

दो सहकमीर् थे। दोनों काम में अच्छे थे लेकिन बतार्व के मामले में एक-दूसरे से काफी भिन्न थे। पहला सहकमीर् जानता था कि उसकी गलतियां जबरन निकाली जाती हैं, इसलिए वह गलतियां निकालने वालों को बकशता नहीं था। वह ऐसे लोगों की गलतियां पकड़ने में जुटा रहता। कोई गलती पकड़ मेंआने पर सबके बीच ठीक वैसा ही प्रचारकरता जाता, जैसा कि कभी उस व्यक्ति ने इसके खिलाफ किया होता था। वह अपने दूसरे साथी से अक्सर इस बात पर नोराज होता था कि वह दूसरों की गलतियां ढ़ूंढ़़कर उन्हें शर्मिदा क्यों नहीं करता? या जब वे लोगउसे किसी गलती पर डांटते हैं, तो तुरंत अपनोबचाव क्यों नहीं करता? एक दिन जब इसनेउस मित्रा से इस बारे में पूछा, तब उसने बताया- मित्रा, मैं तुम्हें या तुम्हारे नजरिए को पूरी तरह गलत नहीं कह रहा, लेकिन मेरा मानना यह है कि यदि मैं किसी दूसरे की गलती ढ़ूंढ़ने में ही लगा रहा तो निश्चित तौर पर अपने काम में गलती कर बैठूंगा। [caption id="attachment_632" align="alignleft" width="300"] शिक्षाप्रद कहानि[/caption] इसलिए मैं ऐसा नहीं करता हूं। रही बात सामने वाले द्वारा मेरी गलती बताए जाने पर अपन...

Business कैसे करें?

बिजनेस में संयम अपिर्त ने पढ़़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करने के बजाय खुद का बिजनेस शुरु करने की इच्छा घर वालों को बता दी थी और किसी को कोई ऐतराज त्ती नहीं था। उसने बिजनेस शुरु किया। कुछ समय बीता ही था कि उसका मन डोल गया। उसने सोचा कि एक दूसरे बिजनेस में ज्यादा पैसा है, वही करना चाहिए। तो उसने पहला बिजनेस बंद कर दूसरा शुरु कर दिया। इसमें काफी खर्च तो आना ही था। अब यह उसका हर बार का क्रम हो गया। वह एक महीने तक तो देखता, अगर बिजनेस उसे ज्यादा चलता हुआ न दिखता तो वह कोई दूसरा ज्यादा आकर्षक बिजनेस शुरु कर देता। [caption id="attachment_629" align="alignleft" width="300"] Hindi Stories[/caption] जब वह अपनी बड़ी पूंजी और हिम्मत इस सब में गंवा बैठा तो फिर घर पर ही रहने लगा। एक दिन उसके चाचा उसके घर आए तो उन्हें पूरी कहानी पता चली। वे भी अपना बिजनेस करते थे। उन्होंने उसे बैठाया और कहा- अपिर्त, अगर मैं किसी बीज को बोकर, हर हक्ते उसे निकालकर नई-नई जमीनों पर बोता रहूं तो वह ढ़ंग से फलेगा-फूलेगा नहीं। बिजनेस को समय दिए जाने की जरुरत है। एकदम से पौधै पर ही फल लग आने की अप...

उत्कृष्ट हों गुण

संत कबीर से एक बार किसी ने पूछा,कबीर जी, कृपया बताएं कि मुझे इसजीवन में गृहस्थ बनना चाहिए या फिर संन्यासी? कबीर ने कहा, तुम जो कुछ भी बनो, उसमें पूर्णता पाने का प्रयास करो। इतना कहते ही कबीर ने अपनी पत्नी कोआवाज दी। दोपहर का समय था, फिर भीउन्होंने अपनी पत्नी से कहा कि वह एकदीपक जला कर लाए। पत्नी दीपक जलाकरले आई और चली गई। कबीर ने कहा, अगरगृहस्थी बनना है तो एक दूसरे पर विश्वासरखना। उसके बाद कबीर उसे एक टीले परले गए, जहां एक वृद्ध महात्मा रहते थे।कबीर ने उनसे पूछा, आपकी उम्र कितनीहै? महात्मा बोले, अस्सी वर्ष। थोड़ी देर तककबीर उनसे बात करते रहे। [caption id="attachment_619" align="alignleft" width="300"] hindi story[/caption] फिर कहा,महात्मा जी, आपने अपनी आयु नहीं बताई?महात्मा बोले, बेटा, अभी बताया-अस्सीवर्ष। कबीर जिज्ञासु व्यक्ति के साथ नीचेउतर आए। उन्होंने महात्मा को भी नीचेबुलाया। वृद्ध महात्मा हांफते हुए नीचे आगए। कबीर बोले, आपकी आयु कितनी है?महात्मा के चेहरे पर कोई भाव नहीं आया।उन्होंने कहा, अस्सी वर्ष। कबीर ने जिज्ञासुसे कहा, संन्यासी बनो तो ऐसे। तुम्ह...

सीखना है काम

एक ऑफिस में एक ही वर्क प्रोफाइल पर दो लोग नियुक्त हुए- निपुण और उदय। निपुण की डिग्रीज, प्रशिक्षण और अनुभव से ऑफिस में बहुत लोग प्रभावित थे, जबकि ठीक-ठाक पढ़़े उदय को किसी भी अन्य आम कर्मचारी की तरह ही देखा जाता। निपुण की पिछली योग्यताओं को देखते हुए सीनियर्स उस पर काफी ध्यान देते। उसे किसी काम को करने के जैसे-जैसे निर्देश दिए जाते, वह ठीक वैसे ही काम करके ले आता। जबकि उदय को सिर्फ अपने प्रोजेब्ट और उसकी डेडलाइन का पता होता था। किसी भी उचित गाइडेंस के अभाव में वह खुद सीनियर्स के पास जा-जाकर पूछता और अपने काम को उत्कृष्ट ढ़ंग से करके तय समय पर ले आता।कएक बड़े प्रोजेब्ट के लिए दोनों में से किसी एक का चयन करने के लिए मैनेजर ने एक परीक्षा ली। उसने दोनों को एक काम सौंप दिया। निपुण किसी भी दिशा-निर्देश की सूची न मिलने पर घबरा गया था क्योंकि सिर्फ बताए गए तरीकों से काम करते हुए वह जान ही नहीं पाया था कि काम करने के अलग- अलग तरीके हैं क्या? वहीं उदय को रटे-रटाए निर्देशों पर चलने के बजाय कहीं अधिक तरीकों का ज्ञान था, तो उसने यह प्रोजेकट जल्दी ही पूरा करके दे दिया। यह घटना निपुण के लिए एक सबक बन गई...

सही नहीं है अति

एक दाशर्निक के पास रोज बहुत लोग परामशर् लेने आते थे। लोग अपनी पारिवारिक उलझनें बताते और उनका समाधान पूछते। एक दिन एक व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ आया और पत्नी के आलस्य और कम्जूसी की निंदा करने लगा। दाशर्निक ने उस महिला को स्नेहपूवर्क अपने पास बुलाया। फिर उन्होंने अपने एक हाथ की मुठठी बांधैकर उसके सामने की और पूछा, अगर यह हमेशा ऐसी ही रहे तो क्या होगा? महिला बोली कि अगर यह हाथ हमेशा ऐसा ही रहेगा तो वह अकड़कर निकम्मा हो जाएगा। उस महिला का जवाब सुन दाशर्निक ने हाथ खोलकर उसके आगे किया और पूछा, अगर यह हमेशा ऐसा रहे तो क्या होगा? वह औरत बोली, तब भी यह अकड़कर बेकार हो जाएगा। दाशर्निक ने लोगों से कहा कि यह महिला बुद्धिमान भी है और दूरदशीर् भी। यह अच्छी तरह जानती है कि मुठठी बंद रखने और हाथ खुला रखने में क्या हानि है? फिर वे उस महिला से बोले, तुम तो खुद सब कुछ समझती हो। इस समझ का प्रयोग दैनिक जीवन में भी करो। किसी भी चीज की अति अच्छी नहीं। न हाथ खुला अच्छा है और न ही बंद। इन दोनों में संतुलन रखकर चलो। न तो लापरवाही से धैन खर्च करो न ही कम्जूसी से। तब तुम सरलता से जीवनयापन कर सकोगी। दाशर्निक की बात...

अच्छे बने रहें Hindi Motivational Story हिंदी कहानी

अच्छे बने रहें एक बार स्वामी दयानंद सरस्वती गंगा के किनारे रुके हुए थे। वहीं पास में एक साधु भी रुका था, जो स्वभाव से गुस्सैल था।एक दिन वह स्वामी दयानंद से नाराज हो गया। अब वह रोज उनकी कुकटिया के बाहर जाता और उनके बारे में अपशब्द बोलता। स्वामी दयानंद इस पर बिल्कुल नाराज नहींहोते थे और न ही अपनी कोई प्रतिक्रिया ही देते थे। उनके शिष्य जब साधु को सबकसिखाने की बात कहते तो स्वामीजी उन्हें रोकते हुए कहते थे- उन्हें अपनी गलती का अहसास अपने आप हो जाएगा। हमें अपने अच्छे व्यवहार के मार्ग से विचलित नहीं होना। एक बार स्वामीजी के पास फलों से भरा टोकरा आया तो उन्होंने उसमें से कुकछअच्छे फल साधु के पास भिजवा दिए। साधु ने नाराज होते हुए फल लेकर आए शिष्य सेकहा- ये फल उसने मेरे लिए नहीं भेजे होंगे।मैं तो रोज उसे गालियां देता हूं। ये फल किसीऔर के लिए होंगे। जाओ यहां से, मुझ से मजाक मत करो। तब शिष्य स्वामी जी के पास पहुंचा। इसके बाद वह स्वामी दयानंद का संदेश लेकर साधु के पास वापस आया औरबोला- स्वामीजी ने कहा है कि आप उन्हें अपशब्द कहने में अपनी बहुमूल्य ऊर्जा खर्चकरते हैं। उस ऊर्जा की भरपाई के लिए हीये फल ...

लगन है जरुरी : Hindi Personal Development Story

Hindi Motivational Story -   एक बार मशहूर वैज्ञानिक एडिसन अपनी प्रयोगशाला में किसी जरुरी शोध मेंलगे हुए थे। उनके पास ही मेज पर कई कागज रखे थे, जिनमें उनकी जरुरी गणना एंथीं। अचानक हवा चली और कागज प्रयोगशाला में बिखर गए। एडिसन औरउनके सहयोगी इन कागजों को समेटने मेंजुट गए। एडिसन इन्हें जोड़कर रखने केलिए Clip ढ़ूंढ़ने लगे। क्लिप मिली तोले किन वह टेढ़़ी थी और कागजों पर सही ढ़ंग से लग नहीं पा रही थी। एडिसन उसे सीधी करने में लग गए। उनके साथी ने उन्हें ऐसा करता देखा तो जाकर Clip का नया पैकेट ले आया और कागजों में Clip लगाकर रख दिया। कुछ देर बाद जब वहीसाथी दोबारा लौटा तो देखा कि एडिसन अभीभी Clip को सीधैी करने में लगे थे। वह बोला- आप अभी भी Clip सीधैी कर रहेहैं? मैं एक घंटे पहले ही Clip लगा चुकाहूं। एडिसन बोले- बात नए या पुराने Clip की नहीं है। बात है किसी समस्या को सुलझाने की। मैं जब किसी काम को हाथमें लेता हूं तो मेरा ध्यान उस काम को पूरा करने पर केन्द्रित रहता है। दोस्तों हमें इस हिंदी कहानी से सिख मिलती है है कि हमें अपने काम को पूरी लगन के साथ करना चाहिए। हिंदी की ऐसे ही Inspirational story प...

नजरिया हो खास : हिंदी कहानी

एक बार किसी कम्पनी में नियुब्त दो लोगों को उनके प्रचार प्रमुख ने बुलाया और कहा कि फलां क्षेत्रा में जाकर हमें अपने जूतों के मार्किट की संभावनाएं तलाशनी हैं। पहले इनमें से एक व्यक्ति वहां गया। वहां के लोगों का रहन-सहन कुकछ इस तरह का था कि वे आम तौर पर जूते पहनते ही नहीं थे। वह व्यक्ति अपनी रिपोर्ट बनाकर लाया और बोला- सर, वहां के लोगों ने शायद आज तक जूते पहने ही नहीं हैं। ऐसे में हमारा बिजनेस वहां बिल्कुल नहीं चलने वाला। अब दूसरे व्यक्ति को भेजा गया। उसने भी वहां पर यही स्थिति देखी। वह आकर बोलासर, यहां के लोगों ने शायद कभी जूते नहीं पहने और यही बात हमारे बिजनेस को यहां स्थापित करने में उपयोगी साबित हो सकती है। हम इन्हें बेहतर जूते उपलब्धै करवाकर जूते पहनना सिखा सकते हैं। इसलिए यहां हमारे पास कस्टमर बेस की पयार्प्त संभावनाएं हैं। प्रचार प्रमुख इस व्यक्ति की रिपोर्ट से बहुत खुश हुआ क्योंकि उसके सकारात्मक नजरिए ने संभावनाएं तलाश ली थीं। दोस्तों हमे इस कहानी से सिख मिलती है कि हमें जीवन में अपना नजरिया हमेशा सकारात्मक रखना चाहिए। ऐसी ही प्रेरणादायक और ज़िन्दगी को सफलता तक पहुचाने वाली हिंदी क...

देखें अपने गुण : Hindi Motivational Kahani

एक कौआ की kahanai - एक कौआ जंगल में रहता था। अपने जीवन से बेहद संतुष्ट होकर वह इधर- उधर उड़ता और प्रकृति का आनंद लेता। लेकिन एक दिन उसने हंस को देखा। एकदम श्वेत और निर्मल। कौआ सोचने लगा, इसका सफेकद रंग इतना सुंदर है, यह सबसे ज्यादा खुश होगा। कौए ने हंस से यही बात पूछी तो वह बोला, हां मैं पहले खुश था लेकिन जब से तोते को देखा तो मुझे लगता है, वह ज्यादा खुश है क्योंकि उसके पास तो दो रंग हैं। अब कौए ने तोते से पूछा- भाई तुम दो रंग पाकर बहुत खुश हो ना? तोता बोला- हां, कभी मैं खुश था लेकिन जब से मोर को देखा, तो लगा , असली खुशी तो सिर्फ इसके पास है। इतना रंगबिरंगा और खूबसूरत। अब कौआ चिडि़याघर में मोर से मिलने जा पहुंचा। मोर को देखने बहुत लोग आए थे। जब वे चले गए तो कौआ उससे मिला। उसने मोर से पूछा- तुम इतने सुंदर हो, तुम तो बहुत खुश रहते हो ओगे? मोर बोला, सुंदर तो हूं लेकिन यहां चिडि़याघर में कैद हूं। मैंने देखा है कि कौए को कोई बंद करके चिडि़याघर में नहीं रखता। वह आजाद घूमता है। मुझे तो लगता है कि इस जीवन में सबसे ज्यादा खुश और संतुष्ट तुम कौए हो। मोर की बात सुनकर कौआ उसका मुंह देखता रह गया। व...