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नटराज ध्यान : Osho Dhyan

दोस्तों आपकीसहायता हिंदी पोर्टल पर ये ओशो के द्वारा बताई गई ध्यान की 8 वि विधि है पहले की साथ विधि इस प्रकार है सक्रिय ध्यान  कुंडलिनी ध्यान अग्निशिखा ध्यान कीर्तन ध्यान गौरीशंकर ध्यान मंडल ध्यान त्राटक ध्यान विधि : ओशो इन सभी विधियों को पढने में आपको समय लग सकता है इसलिए इस साईट बाद में देखने के लिए या फिर कभी पढने के लिए अपने ब्राउज़र में के Bookmark में डाल ले बुकमार्क में डालने के लिए Ctrl + D दबाएँ. और दायीं साईट में ईमेल सब्सक्रिप्शन आप्शन उसमे अपनी ईमेल डाल दे जिससे ध्यान या ओशो के बारे में आने वाली नई जानकारी आपके ईमेल में मेसेज से पहुच जाए वो भी फ्री में. इसलिए अभी अपना ईमेल डालें.   नटराज (Nataraj) ध्यान के संबंध में बोलते हुए ओशो ने कहा है—परमात्मा को हमने नटराज की भांति सोचा है। हमने शिव की एक प्रतिमा भी बनाई है नटराज के रूप में। परमात्मा नर्तक की भांति है, एक कवि या चित्रकार की भांति नहीं। एक कविता या पेंटिंग बनकर कवि से, पेंटर से अलग हो जाती है; लेकिन नृत्य को नर्तक से अलग नहीं किया जा सकता। उनका अस्तित्व एक साथ है; कहना चाहिए एक है। नृत्य और नर्तक एक हैं...

त्राटक ध्यान विधि : ओशो

ये है ध्यान की 7 वी विधि और इसमें आज मैं आपको त्राटक के द्वारा ध्यान कैसे करें. मेरे नजर में ये सबसे सरल ध्यान है और मैंने सुना है इस ध्यान से दीव्य शक्ति भी  प्राप्त की जा सकती है लेकिन यह विधि आपको लगातार करनी पड़ेगी. इस विधि को  Tratak Sadhana या त्राटक साधना भी कहते है. प्रयोग एक घंटे का है। पहला चरण चालीस मिनट का और दूसरा बीस मिनट का। Tratak का पहला चरण (Osho Meditation Technique) कमरे को चारों ओर से बंद कर लें, और एक बड़े आकार का दर्पण अपने सामने रखें। कमरे में बिलकुल अंधेरा होना चाहिए। अब एक दीपक या मोमबत्ती जलाकर दर्पण के बगल में इस प्रकार रखें कि उसकी रोशनी सीधी दर्पण पर न पड़े। सिर्फ आपका चेहरा ही दर्पण में प्रतिबिंबित हो, न कि दीपक की लौ। अब दर्पण में अपनी दोनों आंखों में बिना पलक झपकाए देखते रहें—लगातार चालीस मिनट तक। अगर आंसू निकलते हो तो उन्हें निकलने दें, लेकिन पूरी कोशिश करें कि पलक गिरने न पाए। आंखों की पुतलियों को भी इधर-उधर न घूमने दें—ठीक दोनों आंखों में झांकते रहें। ओशो की ध्यान की एक और अन्य विधि - कुंडलिनी ध्यान : Osho Meditation दो-तीन दिन के भीतर ही विचित्र घटन...

मंडल ध्यान : Osho Meditation Technique

दोस्तों इस वेबसाइट पर ओशो के द्वारा बताई गई ध्यान की 5 विधि मैंने पहले आपको बता दी थी ये है 6 नंबर की विधि. Osho की सभी विधि पढने के लिए यहाँ पर क्लिक करें Osho All Dhyan Vidhi घंटेभर के इस शक्तिशाली ध्यान में पंद्रह-पंद्रह मिनट के चार चरण हैं। पहला चरण खड़े होकर करना है; दूसरा बैठकर; तीसरा और चौथा सर्वथा निष्क्रिय होकर। सूर्योदय के बाद या सूर्यास्त के पहले, इसे कभी भी किया जा सकता है। पहला चरण - ओशो  आंखें खुली रखकर एक ही स्थान पर खड़े-खड़े दौड़ें। जहां तक बन पड़े घुटनों को ऊपर उठाएं। श्वास को गहरा और सम रखें। इससे ऊर्जा सारे शरीर में घूमने लगेगी। दूसरा चरण Osho आंखें बंद कर बैठ जाएं। मुंह को शिथिल और खुला रखें—और धीमे-धीमे चक्राकार झूमें—जैसे हवा में पेड़-पौधे झूमते हैं। इससे भीतर जागी ऊर्जा नाभि-केंद्र पर आ जाएगी। तीसरा चरण अब आंखें खोलकर पीठ के बल सीधे लेट जाएं—और दोनों आंखों की पुतलियों को क्लॉकवाइज़-बाएं से दाएं वृत्ताकार घुमाएं। पहले धीरे-धीरे घुमाना शुरू करें, क्रमशः गति को तेज और वृत्त को बड़ा करते जाएँ। ध्यान की अन्य विधि - कुंडलिनी ध्यान : Osho Meditation मुंह को शिथिल व ख...

गौरीशंकर ध्यान : ओशो ध्यान विधि

दोस्तों ये ध्यान की 5 वी विधि में आपको बताने जा रहा हू पहले की चार विधि पढने के लिए निम् लिंक पर क्लिक करें Osho Meditation Techniques For Beginner in Hindi  घंटेभर के इस ध्यान में चार चरण हैं और प्रत्येक चरण पंद्रह मिनट का है। पहले चरण को ठीक से करने पर आपके रक्त प्रवाह में कार्बन-डाय-आक्साइड का तल इतना ऊंचा हो जाएगा कि आप अपने को गौरीशंकर-एवरेस्ट शिखर पर महसूस करेंगे। वह आपको इतना ऊपर उठा देगा। इस ध्यान प्रयोग के दूसरे चरण में साधकों के सामने प्रकाश का एक बल्ब तेजी से सतत जलता-बुझता रहता है। पहला चरण (ओशो)  आंखें बंद कर बैठ जाएं। अब नाक से उतनी गहरी श्वास भीतर लें, जितनी ले सकते हैं। और इस श्वास को भीतर तब तक रोके रहें, जब तक ऐसा न लगने लगे कि अब अधिक नहीं रोका जा सकता। फिर धीरे-धीरे श्वास को मुंह से बाहर निकाल दें। और फिर तब तक भीतर जाने वाली श्वास न लें, जब तक लेना मजबूरी न हो जाए। यह क्रम पंद्रह मिनट तक जारी रखें। दूसरा चरण By Osho श्वसन-क्रिया को सामान्य हो जाने दें। आंखें खोल लें और सतत जलते-बुझते हुए तेज प्रकाश को धीमे-धीमे देखते रहें। दृष्टि को तनाव नहीं देना है। और शरीर को पू...

अग्निशिखा ध्यान : ओशो ध्यान विधि

दोस्तों आज मैं आपके सामने ओशो (Osho) के द्वारा बताई गई सर्वप्रसिद विधि (Meditation) अग्निशिखा (Agnishikha) Share कर रहा हु आशा करता हु आपको पसंद आएगी. अच्छा हो कि शाम के समय अग्निशिखा ध्यान किया जाए। और यदि मौसम गर्म हो तो कपड़े उतारकर। इस ध्यान-विधि में पांच-पांच मिनट के तीन चरण हैं। पहला चरण कल्पना करें कि आपके हाथ में एक ऊर्जा का गोला है—गेंद है। थोड़ी देर में यह गोला कल्पना से यथार्थ सा हो जाएगा। वह आपके हाथ पर भारी हो जाएगा। दूसरा चरण ऊर्जा की इस गेंद के साथ खेलना शुरू करें। इसके वजन को, इसके द्रव्यमान को अनुभव करें। जैसे-जैसे यह ठोस होता जाए, इसे एक हाथ से दूसरे हाथ में फेंकना शुरू करें। ओशो की एक अन्य विधि पढने के लिए यहाँ पर क्लिक करें - सक्रिय ध्यान विधि : ओशो  Osho Active Meditation    यदि आप दक्षिणहस्तिक हैं तो दाएं हाथ से शुरू करें और बाएं हाथ से अंत; और यदि वामहस्तिक हैं तो यह प्रक्रिया उलटी होगी। गेंद को हवा में उछालें, अपने चारों ओर उछालें, अपने पैरों के बीच से उछालें-लेकिन ध्यान रखें कि गेंद जमीन पर न गिरे। अन्यथा खेल फिर से शुरू करना पड़ेगा। इस चरण के अंत में गें...

सक्रिय ध्यान विधि : ओशो

हमारे शरीर और मन में इकट्टे हो गए दमित आवेगों, तनावों एवं रुग्णताओं का रेचन करने, अर्थात उन्हें बाहर निकाल फेंकने के लिए ओशो ने इस नई Meditation विधि का सृजन किया है। शरीर और मन के इस रेचन अर्थात शुद्धिकरण से, साधक पुनः अपनी देह-ऊर्जा, प्राण-ऊर्जा, एवं आत्म-ऊर्जा के संपर्क में-उनकी पूर्ण संभावनाओं के संपर्क में आ जाता है—और इस तरह साधक आध्यात्मिक जागरण की ओर सरलता से विकसित हो पाता है। सक्रिय ध्यान अकेले भी किया जा सकता है और समूह में भी। लेकिन समूह में करना ही अधिक परिणामकारी है। स्नान कर के, खाली पेट, कम से कम वस्त्रों में, आंखों पर पट्टी बांधकर इसे करना चाहिए। यह विधि पूरी तरह प्रभावकारी हो सके, इसके लिए साधक को अपनी पूरी शक्ति से, समग्रता में इसका अभ्यास करना होगा। इसमें पांच चरण हैं। पहले तीन चरण दस-दस मिनट के हैं तथा बाकी दो पंद्रह-पंद्रह मिनट के। सुबह का समय इसके लिए सर्वाधिक उपयोगी है, युं इसे सांझ के समय भी किया जा सकता है। पहला चरण By Osho अपनी पूरी शक्ति से तेज और गहरी श्वास लेना शुरू करें। श्वास बिना किसी नियम के, अराजकतापूर्वक-भीतर लें, बाहर छोड़ें। श्वास नाक से लें। श्वास...