Skip to main content

सही नहीं है अति

एक दाशर्निक के पास रोज बहुत लोग परामशर् लेने आते थे। लोग अपनी पारिवारिक उलझनें बताते और उनका समाधान पूछते। एक दिन एक व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ आया और पत्नी के आलस्य और कम्जूसी की निंदा करने लगा। दाशर्निक ने उस महिला को स्नेहपूवर्क अपने पास बुलाया।

फिर उन्होंने अपने एक हाथ की मुठठी बांधैकर उसके सामने की और पूछा, अगर यह हमेशा ऐसी ही रहे तो क्या होगा? महिला बोली कि अगर यह हाथ हमेशा ऐसा ही रहेगा तो वह अकड़कर निकम्मा हो जाएगा।

उस महिला का जवाब सुन दाशर्निक ने हाथ खोलकर उसके आगे किया और पूछा, अगर यह हमेशा ऐसा रहे तो क्या होगा? वह औरत बोली, तब भी यह अकड़कर बेकार हो जाएगा। दाशर्निक ने लोगों से कहा कि यह महिला बुद्धिमान भी है और दूरदशीर् भी। यह अच्छी तरह जानती है कि मुठठी बंद रखने और हाथ खुला रखने में क्या हानि है? फिर वे उस महिला से बोले, तुम तो खुद सब कुछ समझती हो।

इस समझ का प्रयोग दैनिक जीवन में भी करो। किसी भी चीज की अति अच्छी नहीं। न हाथ खुला अच्छा है और न ही बंद। इन दोनों में संतुलन रखकर चलो। न तो लापरवाही से धैन खर्च करो न ही कम्जूसी से। तब तुम सरलता से जीवनयापन कर सकोगी। दाशर्निक की बातों में छिपा हुआ संदेश उस महिला को पूरी तरह समझ में आ गया था।
Friends हमें इस हिंदी कहानी से सिख मिलती है कि  अपने व्यवहार को संतुलित रखें।

Popular posts from this blog

कुंडलिनी ध्यान : Osho Meditation Technique

दोस्तों आज मैं आपके साथ कुंडलिनी ध्यान (kundalini Meditation) विधि शेयर करने जा रहा हू जो ओशो (Osho) के द्वारा बताई गई है. यह एक अदभुत ध्यान-पद्धति है और इसके जरिए मस्तिष्क से हृदय में उतर आना आसान हो जाता है। [caption id="attachment_698" align="alignnone" width="300"] ओशो कुंडलिनी ध्यान विधि[/caption] एक घंटे के इस ध्यान में पंद्रह-पंद्रह मिनट के चार चरण हैं। पहले और दूसरे चरण में आंखें खुली रखी जा सकती हैं। लेकिन तीसरे और चौथे चरण में आंखें बंद रखनी हैं। सांझ इसके लिए सर्वाधिक उपयुक्त समय है। पहले चरण की संगति सपेरे के बीन-स्वर के साथ बिठायी गयी है। जैसे बीन-स्वर पर जैसे सर्प अपनी कुंडलिनी तोड़कर उठता है, और फन निकालकर नाचने लगता है, वैसे ही इस ध्यान के सम्यक प्रयोग पर साधक की सोई हुई कुंडलिनी शक्ति जाग उठती है। कुंडलिनी ध्यान विधि (By Osho) का  पहला चरण  शरीर को बिलकुल ढीला छोड़ दें और पूरे शरीर को कंपाएं, शेक करें। अनुभव करें कि ऊर्जा पांव से उठकर ऊपर की ओर बढ़ रही है। kundalini Meditaion  विधि ( Osho) का दूसरा चरण संगीत की लय पर नाचे—जैसा आपको भाए—और...

अग्निशिखा ध्यान : ओशो ध्यान विधि

दोस्तों आज मैं आपके सामने ओशो (Osho) के द्वारा बताई गई सर्वप्रसिद विधि (Meditation) अग्निशिखा (Agnishikha) Share कर रहा हु आशा करता हु आपको पसंद आएगी. अच्छा हो कि शाम के समय अग्निशिखा ध्यान किया जाए। और यदि मौसम गर्म हो तो कपड़े उतारकर। इस ध्यान-विधि में पांच-पांच मिनट के तीन चरण हैं। पहला चरण कल्पना करें कि आपके हाथ में एक ऊर्जा का गोला है—गेंद है। थोड़ी देर में यह गोला कल्पना से यथार्थ सा हो जाएगा। वह आपके हाथ पर भारी हो जाएगा। दूसरा चरण ऊर्जा की इस गेंद के साथ खेलना शुरू करें। इसके वजन को, इसके द्रव्यमान को अनुभव करें। जैसे-जैसे यह ठोस होता जाए, इसे एक हाथ से दूसरे हाथ में फेंकना शुरू करें। ओशो की एक अन्य विधि पढने के लिए यहाँ पर क्लिक करें - सक्रिय ध्यान विधि : ओशो  Osho Active Meditation    यदि आप दक्षिणहस्तिक हैं तो दाएं हाथ से शुरू करें और बाएं हाथ से अंत; और यदि वामहस्तिक हैं तो यह प्रक्रिया उलटी होगी। गेंद को हवा में उछालें, अपने चारों ओर उछालें, अपने पैरों के बीच से उछालें-लेकिन ध्यान रखें कि गेंद जमीन पर न गिरे। अन्यथा खेल फिर से शुरू करना पड़ेगा। इस चरण के अंत में गें...

सक्रिय ध्यान विधि : ओशो

हमारे शरीर और मन में इकट्टे हो गए दमित आवेगों, तनावों एवं रुग्णताओं का रेचन करने, अर्थात उन्हें बाहर निकाल फेंकने के लिए ओशो ने इस नई Meditation विधि का सृजन किया है। शरीर और मन के इस रेचन अर्थात शुद्धिकरण से, साधक पुनः अपनी देह-ऊर्जा, प्राण-ऊर्जा, एवं आत्म-ऊर्जा के संपर्क में-उनकी पूर्ण संभावनाओं के संपर्क में आ जाता है—और इस तरह साधक आध्यात्मिक जागरण की ओर सरलता से विकसित हो पाता है। सक्रिय ध्यान अकेले भी किया जा सकता है और समूह में भी। लेकिन समूह में करना ही अधिक परिणामकारी है। स्नान कर के, खाली पेट, कम से कम वस्त्रों में, आंखों पर पट्टी बांधकर इसे करना चाहिए। यह विधि पूरी तरह प्रभावकारी हो सके, इसके लिए साधक को अपनी पूरी शक्ति से, समग्रता में इसका अभ्यास करना होगा। इसमें पांच चरण हैं। पहले तीन चरण दस-दस मिनट के हैं तथा बाकी दो पंद्रह-पंद्रह मिनट के। सुबह का समय इसके लिए सर्वाधिक उपयोगी है, युं इसे सांझ के समय भी किया जा सकता है। पहला चरण By Osho अपनी पूरी शक्ति से तेज और गहरी श्वास लेना शुरू करें। श्वास बिना किसी नियम के, अराजकतापूर्वक-भीतर लें, बाहर छोड़ें। श्वास नाक से लें। श्वास...